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✨ परित्याग

हंस पत्रिका – अगस्त 2025 अंक 🌿 छोड़ना पर, कुछ इस तरह छोड़नाजैसे छोड़ता है पेड़ पत्तियाँ, पतझड़ मेंनई पत्तियों के लिए जगह बनाते हुए. 🛠️ छोड़ना पर, कुछ इस तरह छोड़नाजैसे छोड़ता है मजदूर अपना गातमेहनत से अपनी छाती…

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जगह

पाखी और गौरैया : एक खिड़की, दो दुनिया खट-खट-फर्राक-फर-फर से उसकी नींद खुल गई। पाखी उछलकर उकडू बैठ गई। गौरैया बौखलाई हुई शीशे बंद खिड़की से अंदर घुसने की बेतरह कोशिश कर रही थी। बेताब होकर पाखी ने गुहारा —…

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🕳️ कूप में भंग

🌤️ कहानी ✍️ लेखक – राघवेन्द्र प्रपन्न “हाई स्वीटी! हेलो क्यूटी!”वह देख रहा था — उसके यहाँ आई सात साला बच्ची तीन उछाल ले चुकी थी। “क्या तुम्हें यह चाहिए?”“हाँ अंकल! यह बहुत प्यारा है।” बच्ची का बाप वहाँ पहुँच…

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🪨 हाथ का पत्थर

🌤️ कहानी ✍️ लेखक – राघवेन्द्र प्रपन्न ट्रिन-ट्रिन!“हेलो! नमस्ते! पहचाना नहीं नन्हे पंडित जी! मैं मुस्तफकिन! अभी भी ध्यान नहीं आया? दसियों दफ़ा तो आप गुरुआइन जी के साथ हमारी दुकान पर आए हैं. गुरुआइन जी को मैंने एक प्याली…

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❓ ताज्जुब

शिक्षक बचते हैंऐसे प्रश्न बनाने सेजिनके जवाब के सही-ग़लत होने कीज़िम्मेदारी उन पर आ जाए। विद्यार्थी बचते हैंऐसे उत्तर देने सेजिनके सही-ग़लत होने कीज़िम्मेदारी उन पर आ जाए। पत्रकार बचते हैंऐसे प्रश्न पूछने सेजिससे सवाल के, सवाल बन जाने कीज़िम्मेदारी…

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🔢 गणित की ज़िंदगी

वैसे तो आरंभिक अवस्था में बच्चे,सीखते हैं गणित के पूर्णांक –1, 2, 3,पर पूरे दिन जिस्म तोड़ने के बादउसने अपने बाप कोचार पेट की भरपूर भूख के सामनेएक पावरोटी कोचार हिस्सों में फाड़ते देखसीखा — पौना-चौथाई। एक प्याली चाय की…

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🌾 अपवाद

वैसे तो सजीव और निर्जीव मेंबुनियादी फ़र्क़ होता है,पर एक चीज़ में वे समान होते हैं —वह यह कि, वे प्रतिक्रिया देते हैं। जैसे, रूई अपने धुने जाने परखूब उत्पात मचाती है,जैसे, नदी अपने बाँधे जाने परखूब फनफनाती है,जैसे, बैल…

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✨ केवल इसलिए

केवल इसलिएन गिरते जानाक्योंकि तुमने गिरना शुरू कर दियाऔर एक बार गिरना शुरू हो जाने पररुकना नामुमकिन है।तुम कोई वस्तु नहीं कि तुम परवस्तुओं के गिरने का नियम लागू होता है। केवल इसलिएख़ंजर झिड़कने सेपरहेज न करना क्योंकिखंजर का अपना…

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🌿 पायंदाज (पाँवपोछनी)

सत्ता और जनता के मुहाने पर पड़ामैं पायंदाज हूँ।मेरी कई क़िस्में हैं —जिनमें से कुछ प्रमुख हैं —समरसता, लोकतंत्र और देशभक्ति। सत्ता से जनताऔर जनता से सत्ता मेंआवाजाही के बीचम-बीचपड़ा-पड़ा मैंकेवल पाँव साफ़ करने के काम आता हूँ।

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✨ शब्दों की चुप्पियाँ

भरमार शब्दों के बीचजो पढ़ नहीं सकतेउनके लिए तो शब्द है — अनपढ़पर जो पढ़ना जानते हुए भीपाठ से बच निकलते हैंउनके लिए क्या है? जो देख नहीं सकतेउनके लिए तो शब्द है —पर जो देखकर भीपतली गली से निकल…

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