जगह

पाखी और गौरैया : एक खिड़की, दो दुनिया

खट-खट-फर्राक-फर-फर से उसकी नींद खुल गई। पाखी उछलकर उकडू बैठ गई। गौरैया बौखलाई हुई शीशे बंद खिड़की से अंदर घुसने की बेतरह कोशिश कर रही थी। बेताब होकर पाखी ने गुहारा — “आजा… आ—न—”

“कहाँ से आऊँ? तुमने मकान का एक-एक छेद तक तो भर रखा है!” पाखी दनदनाते हुए बाबा की कुर्सी के पास जा खड़ी हुई और उनकी छाती पर मुक्कियाँ बरसाने लगी। बाबा झल्ला कर बोले — “हो गई शुरू सुबह-सुबह! न पप्पिया-झप्पिया, न पारी-सारी। ‘दंगल’ फिल्म कुछ ज़्यादा ही सर पर चढ़ गई लगती है।”

पाखी ने कुछ नहीं सुना। उसने बाबा को घसीटकर खिड़की के पास लाकर खड़ा किया और बोली — “देखो! हमसे मिलने मेरी दोस्त आई है।” बाबा ने हँसते हुए कहा — “पागल! दोस्त दरवाज़े से आते हैं, खिड़की से नहीं।”

“अरे! वहाँ गौरैया अंदर आने के लिए शीशे से लड़ रही थी। हम, आप, मामा, चाची तो इस दरवाज़े से आते हैं, गौरैया भला कहाँ से आए-जाए?” बाप-बेटी के बीच झगड़ा फूट चुका था।

“तुम्हीं ने तो कहा था — गरमी बहुत लगती है! अब याद आया? या तो घर में ए.सी. होगा या फिर परिंदों के बेरोक-टोक आने-जाने की जगहें। Choice is yours।”

पाखी बोली — “मैं तो गरमी से थोड़ी राहत चाहती हूँ, ए.सी. थोड़े ही माँगा था।” बाबा उसकी आँखों में देख रहे थे — उनमें एक सवाल था:

“गरमी से राहत और गौरैया के बीच वैर का यह जाल हमने तो नहीं बुना। फिर वह है कौन? इसके जवाब में कौन-सी किताब पलटूँ, बताओ न बाबा?”

बाबा, जो खुद को बड़ा शिक्षाविद् मानते थे, आसमान-ज़मीन नापने लगे।

कहानी का सार

यह कहानी केवल एक बच्ची और गौरैया की नहीं है, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच बदलते रिश्तों की है। आज हम अपने घरों को ठंडा और सुरक्षित बनाने की दौड़ में उन नन्हीं जिंदगियों के रास्ते बंद कर चुके हैं जो कभी हमारे घरों का हिस्सा थीं।

  • गौरैया – प्रकृति और मासूमियत का प्रतीक
  • बंद खिड़कियाँ – कृत्रिम जीवन, आधुनिक सुविधाओं का घेरा
  • पाखी – नई पीढ़ी की संवेदनशीलता और प्रश्न
  • बाबा – पुरानी पीढ़ी का व्यावहारिक दृष्टिकोण और अपराधबोध


आधुनिक सुविधाएँ हमें भले “आराम” दें, लेकिन वे हमें प्रकृति से दूर करती जा रही हैं। असली “गरमी से राहत” तो तभी मिलेगी जब इंसान और परिंदे एक-दूसरे के साथ साँस ले सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!