शिक्षक बचते हैं
ऐसे प्रश्न बनाने से
जिनके जवाब के सही-ग़लत होने की
ज़िम्मेदारी उन पर आ जाए।
विद्यार्थी बचते हैं
ऐसे उत्तर देने से
जिनके सही-ग़लत होने की
ज़िम्मेदारी उन पर आ जाए।
पत्रकार बचते हैं
ऐसे प्रश्न पूछने से
जिससे सवाल के, सवाल बन जाने की
ज़िम्मेदारी उन पर आ जाए।
साधारण लोग बचते हैं
ऐसे सवाल करने से
जिससे सवाल करने की
ज़िम्मेदारी उन पर आ जाए।
विशेष लोग बचते रहे हैं
ऐसे सवाल करने से
जिससे उनकी विशिष्टता
सवाल के घेरे में आ जाए।
इस प्रकार सभी
ऐसे प्रश्नों और उत्तरों की ओर उमड़ रहे हैं,
जिसकी ज़िम्मेदारी किसी और के ऊपर आ जाए।
वे बचे रहना चाहते हैं, महफ़ूज़ रहना चाहते हैं —
फिर सभी
ताज्जुब से पूछ रहे हैं कि
हमारी नियति का फैसला कोई और क्यों ले रहा है।